प्रभु की इच्छा, मेरी इच्छा

by स्टुअर्ट जी. रेम्पेल से

Preparing a willएक ख्रिश्चन पुरोहिताई के समारोह में उन के सदस्यों को जायदाद नियोजन के मामले प्रस्तुत करने के लिए मुझे आमंत्रित किया गया था.

प्रस्तुति के पश्चात, एक व्यावसायिक व उस की पत्‍नी ने उनकी जायदाद के बारे में चर्चा का आरंभ किया. चर्चा के दौरान मैं ने उन से पूछा, "क्या आप अपनी जायदाद का कुछ हिस्सा प्रभु को उसके काम के लिए प्रदान करने की बात सोची है?"

इस प्रकार कभी सोचा नहीं है ऐसी प्रतिक्रिया देते हुए ऐसा करने के बारे में उन्हों ने रुचि दिखाई. बाद में, "हमें प्रभु को कितना देना चाहिए?" इस सीधे सवाल से उन्होंने संपर्क किया.

इस प्रकार की स्थिति की मजे की बात ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है जो प्रभु की भक्ति करते हैं और प्रभु की इच्छा उन की इच्छा से मिलाने हेतु उस के लिए जीने की अपेक्षा रखते हैं.

प्रतिक्रिया में, उस दम्पति को मैं ने कहा, "उस के बारे में एक-दूसरे के साथ बातचीत करें और समझदारी के लिए प्रार्थना करें. प्रभु आप को मार्गदर्शन करेगा." 1 John 5:14-15

मेरा ऐसा निरीक्षण है कि प्रभु की भक्ति करनेवाले तथा उस के लिए जीनेवाले सफल लोग सामान्यतः उनकी जायदाद के बारे में प्रभु उन से क्या कराना चाहता है उसके अन्वेषण की जिम्मेवारी का स्वीकार करते हैं

वैसे ही, इस बारे में कोई सामान्य सूत्र तथा दिग्दर्शन नहीं है जिस के लिए विशिष्ट प्रतिशत या डालर रक़म की आवश्यकता हो.

कई श्रद्धालु कहते हैं, "जो भी मेरे पास है वह सब प्रभु का है. मैं केवल विश्वस्त हूँ. उस ने जो प्रदान किया है उस का प्रबंध करने का काम उस नें मुझे सौंपा है.

अगर यह सच है, तो हर ख्रिश्चन को जरूरी है कि वह उसे चाहे और उस की जायदाद के बारे में उसकी इच्छा की अपेक्षा करें.

जैसे ही आप उसे चाहते हैं, यहाँ पर कुछ मुद्दे हैं जो ग़ौरतलब हैं -

दंपतियों के लिए मृत्यू एक सामाईक आपत्ति हो सकती है, या आप अपनी पूरी जिंदगी जी सकते हैं जिस स्थिति में आप में से हरएक के मृत्यू का समय भिन्न हो सकता है. उस के लिए विभिन्न नियोजन जरूरी है.

क्या आप अपनी 'कुछ भी नही', 'कुछ मात्रा में', या 'पूरी' जायदाद अपने परिवार को देना चाहते हैं? पुरोहिताई को देना चाहते हैं?

आप अपनी जायदाद कब देना चाहते हैं - मृत्यू के बाद, जीते जी या दोनों का संमिश्रण?

सेवानिवृत्त कालावधि के लिए आप के कितना जरूरी है?

परिवार के व्यवसाय के बारे में क्या प्रबंध है? उसे किस प्रकार परिवार को सौंपना, अपनी सेवानिवृत्ति का नियोजन करना और फिर पुरोहिताई को देना चाहते हैं?

ये सब सर्वसाधारण मुद्दे हैं जिन पर बोलते समय और प्रार्थना करते समय आप को सोचविचार करना है.

जायदाद नियोजन के लिए कुछ साधन उपलब्ध हैं जो आप को सामने से विवादास्पद लगने वाले मुद्दों को सुलझाने में सहाय्यकारी होंगे.

शायद वित्तीय सलाहकार को शामिल करा लेना जरूरी होगा.

तीन वास्तविक-जीवन के उदाहरण दिखा देंगे अन्य दैवी पुरुष तथा महिलाओं ने अपनी जायदाद के मुद्दों का कैसे व्यवहार किया.

उदाहरण क्र. १ - व्यवसाय की बिक्री का, बड़ी जायदाद

जॉन और उसकी पत्‍नी ट्‍रूडी (उन के असली नाम नहीं) ने अपना व्यवसाय बेचा और तुरंत उन के बच्चों में से हरएक को उसकी शिक्षा, व्यवसाय की शुरुआत, घर के लिए अनामत, कार खरीदना या कोई ऐषआराम की चीज खरीदना, जो भी वह चाहें, उस के लिए कोई शर्त नहीं, इन सब के लिए "अवसर" निधि उपलब्ध कराया.

उन्होंने अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा अपने सेवानिवृत्त कालावधि के लिए निकाला, और बाकी बची हई संपत्ति जो किसी भी दृष्टि से भारी रक़म थी तथा जायदाद का भलीभाँती भारी हिस्सा था, वह ख्रिश्चन पुरोहिताईयों में बाँटने हेतू निवेशित किया.

उनकी बची हुई जिंदगी के कालावधि में इस संपत्ति का बँटवारा हो जाए ऐसी योजना थी.

उन प्रदानों का चयन करने के लिए बच्चों को आमंत्रित किया गया था.

उदाहरण क्र. २ - व्यवसाय चलता रहे, परिवार की खास जरूरतें

बिल और उसकी पत्‍नी सुसान (उनके असली नाम नहीं) ने अभी अभी उनका इच्छापत्र तथा वसीयतनामा का नूतनीकरण किया है. उन्हे एक प्रौढ संतान है जिसे बिना उनके समर्थन, किसी कल्याणकारी निधि पर निर्भर रहना पडता था. इस संतान के घर, परिवहन, इ. मूलभूत जरूरतों के लिए प्रबंध कर रहे हैं.

उनके इच्छापत्र में उन्हों ने निधि का प्रबंध किया है जो उस प्रौढ संतान के पूरी जिंदगी के कालावधि में उसे समर्थन देने हेतु इस्तेमाल करने के लिए विश्वस्तों को उपलब्ध होगा.

इस खास जरूरत के अलावा, उन्होंने जायदाद का एक-तिहाई हिस्सा उनके पाँच बच्चों के लिए, एक-तिहाई उनके पोतों के लिए और एक-तिहाई ख्रिश्चन पुरोहिताई के लिए देने का तय किया है.

बिल और स्यू एक व्यवसाय के मालिक हैं तथा उनका वह व्यवसाय बेचने की वे सोच रहे हैं. उनके सेवानिवृत्त कालावधि के लिए पर्याप्त निधि का प्रबंध करना और बाकी का समान हिस्सों में उनके बच्चे, पोते और पुरोहिताई में उनके जीते जी बँटवारा करने की तथा फिर जो बचेगा उसकी व्यवस्था उनके मृत्यू के पश्चात करने की उनकी योजना है.

उदाहरण क्र. ३ - व्यवसाय बेचा, बड़ी जायदाद

बेन और उसकी पत्‍नी मेरी (उनके असली नाम नहीं) ने अपना व्यवसाय बेचा और उस निधि का इस्तेमाल वे अपने सेवानिवृत्त कालावधि के लिए और अन्य निवेश के लिए कर रहे हैं.

उनकी योजना के मुताबिक, एक विशिष्ट रक़म, जो उनकी जायदाद का लगभग १० प्रतिशत हिस्सा है, उनके बच्चों को देने का उन्हों ने फैसला किया है और यह रक़म उन बच्चों की जीवनशैली सुधारने के लिए, उनके पोतों की शिक्षा के लिए सहाय्य करने के लिए तथा वैसे ही अन्य कारणों के लिए पर्याप्त है.

इस रक़म का उनके बच्चों में अगले साल बँटवारा किया जाएगा. उनकी जायदाद का बचा हुआ हिस्सा जो उनके सेवानिवृत्ति कालावधि के लिए जरूरी नहीं है, काफी पर्याप्त है. बेन और मेरी की वह निधि अगले दस सालों में ख्रिश्चन पुरोहिताई को बाँटने की योजना है.

इन उदाहरणों में कई समान धागे दिखाई देंगे, वे इस प्रकार -

पहला, सभी परिवार धनाढ्य कहलाने के लायक हैं. उनके पास इतनी संपत्ति है जो उनके सेवानिवृत्ति के बाद भी अच्छी जीवनशैली की जरूरतों से ज़्यादा है.

दूसरा, उन्हों ने उनकी जायदाद में से कुछ या पूरा हिस्सा अपने बच्चों को अपने जीते जी दिया है या देना चाहा है.

तीसरा, अपने जीवनकाल में, वे जितना संभव हो, ज़्यादा से ज़्यादा पुरोहिताई को देना चाहते हैं.

आप का परिवार है तथा जायदाद है जो प्रभु ने आप को दिया है. आप अपने परिवार तथा अपनी जायदाद के बारे में क्या करते हैं यह आप और उस प्रभु में होनेवाला मामला है. आप जानते हैं कि अपने जीवन के लिए उस का आप क्या करते हैं इसके लिए आप जिम्मेवार हैं.

ये लेख हमें 1 कोरिंथियन्स 3 में याद दिलाते हैं जिस से हमारा मूल्यांकर किया जाएगा. आपके जायदाद की योजना एक गंभीर मामला है. अपनी प्रार्थना के द्वारा उसे प्रभु तक ले जाएं, व्यावसायिक परामर्श लें और एक अच्छा सेवक बनें.

आप की इच्छा प्रभु की इच्छा के अनुरूप बनाएं.

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स्टुअर्ट जी. रेम्पेल, बी.ए.
वित्तीय सलाहकार, बीआरएस फिनान्शियल
बिफार्ट रेम्पेल अ‍ँड कंपनी इन्क.
मेडिसिन, हॅट, अल्बर्टा

 

विश्वस्त, दि ग्रेट कमिशन फाउंडेशन

 

 

 

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